TAMIL NADU: शपथ लेते वक्त स्पीच देने लगे तो राज्यपाल ने टोका; पहला ऑर्डर 200 यूनिट फ्री बिजली का
TAMIL NADU तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) चीफ और एक्टर से नेता बने सी जोसेफ विजय तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री बन गए हैं। उन्होंने रविवार सुबह 10.15 बजे तमिल में शपथ ली। इस दौरान राहुल गांधी भी मौजूद रहे।
थलापित विजय शपथ लेते समय निर्धारित लाइनों के अलावा और बातें बोलने लगे। इस पर राज्यपाल अर्लेकर ने उन्हें टोक दिया और कहा कि वही पढ़ें जो लिखकर दिया है।
सीएम विजय के साथ 9 और मंत्रियों ने भी शपथ ली। इनमें एन आनंद, आधव अर्जुन, डॉ. केजी अरुणराज, केए सेंगोट्टैयन, पी वेंकटरमणन, आर निर्मलकुमार, राजमोहन, डॉ. टीके प्रभु, सेल्वी एस कीर्तना शामिल है।
ये सभी विजय की पार्टी TVK के विधायक हैं। सहयोगी दलों के किसी विधायक को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया है।
सीएम बनते ही विजय एक्शन में आए और दस्तावेजों का पहला सेट साइन किया। इनमें 200 यूनिट फ्री बिजली देने, महिला सुरक्षा दल और एंटी ड्रग्स स्क्वॉड बनाने के आदेश शामिल हैं।
विजय को 121 विधायकों का समर्थन
विजय की पार्टी ने 234 में 108 सीटें जीतीं. सहयोगी दलों के समर्थन के बाद विजय के पास 120 विधायकों का समर्थन है. बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है.
- TVK-108 (प्रभावी संख्या 107 है)
- कांग्रेस- 05
- CPI-02
- CPM-02
- VCK-02
- IUML-02
तमिलनाडु में TVK सबसे बड़ी पार्टी
तमिलनाडु में एक्टर विजय की पार्टी टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. टीवीके को 108 सीटें मिलीं. इसके अलावा DMK को 59, ADMK को 47 सीटें मिलीं. वहीं, कांग्रेस के खाते में 5 सीट गई.
59 साल बाद पहली बार तमिलनाडु में गैर DMK-AIADMK सरकार बनी है. विजय के शपथग्रहण समारोह में राहुल गांधी भी मौजूद थे.
शनिवार को चौथी बार राज्यपाल से मिलने गए थे विजय
इससे पहले शनिवार को विजय ने राज्यपाल अर्लेकर को TVK, कांग्रेस, CPI, CPM, VCK और IUML के 121 विधायकों के समर्थन पत्र सौंपे। इसके बाद राज्यपाल ने उन्हें सरकार बनाने का न्योता दिया।
विजय की दो साल पुरानी पार्टी TVK ने अपने पहले ही विधानसभा चुनाव में 234 में 108 सीटें जीतीं। अब विजय के पास 121 विधायक हैं, जबकि बहुमत का आंकड़ा 118 है।
तमिलनाडु में 1967 के बाद यानी गैर-द्रविड़ दल का मुख्यमंत्री होगा। इससे पहले 1963-1967 तक कांग्रेस सरकार में एम भक्तवत्सलम मुख्यमंत्री थे।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बनने के बाद विजय का मोदी सरकार को लेकर रुख़ क्या होगा?
तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) के अध्यक्ष सी. जोसेफ विजय ने रविवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली.
विजय का शपथ ग्रहण समारोह सुबह 10 बजे चेन्नई के नेहरू स्टेडियम में हुआ. इसमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई नेता भी मौजूद थे.
तमिलनाडु के राज्यपाल ने उन्हें 13 मई तक विश्वास प्रस्ताव पेश करने को कहा है.
दरअसल, पिछले पाँच दिनों में विधानसभा में बहुमत के लिए ज़रूरी 118 का आंकड़ा जुटाने के लिए विजय की टीवीके को काफ़ी संघर्ष करना पड़ा.
टीवीके को अब कांग्रेस, लेफ़्ट, वीसीके और आईयूएमएल दलों का समर्थन प्राप्त है. विजय ने महज दो साल पहले ही पार्टी बनाई थी.
गठबंधन की सरकार में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, क्या विजय इन चुनौतियों को पार कर पाएंगे?
गठबंधन के बीच संतुलन

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बीबीसी तमिल से बात करते हुए वरिष्ठ पत्रकार शिवप्रियन का कहना है कि टीवीके को उसी तरह से दबावों का सामना करना पड़ेगा, जिस तरह के दबाव का सामना केंद्र की बीजेपी सरकार का विरोध करते हुए डीएमके को करना पड़ा.
शिवप्रियन कहते हैं, “केए सेंगोट्टयन के अलावा टीवीके में किसी को भी सरकारी प्रशासन का अनुभव नहीं है. ऐसे में, कांग्रेस से जो लोग शामिल हो सकते हैं, उनके पास कुछ राजनीतिक अनुभव होना चाहिए. इसी तरह, तिरुमावलवन के पास भी अनुभव है. हालांकि उनके पास प्रशासनिक अनुभव नहीं है.”
उन्होंने बताया, “विजय को ऐसे अनुभवी लोगों का मार्गदर्शन मिलेगा. इसके अलावा, भले ही वह सेंगोट्टयन की बातों को नज़रअंदाज कर दें, लेकिन विजय कांग्रेस, लेफ़्ट और वीसीके जैसे दलों की बातों को सुनने से बच नहीं सकते. सत्ता में बने रहने के लिए उन्हें इन दलों के समर्थन की ज़रूरत है.”

शिवप्रियन कहते हैं, “वीसीके और वामपंथी दल विजय से सहमत नहीं हुए तो उन्हें समझौता करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है.”
भले ही लेफ़्ट ने टीवीके को अपना समर्थन दे दिया है, पर साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि अगर नई सरकार राज्यों के अधिकारों से संबंधित मुद्दों पर सही तरीक़े से काम नहीं करती तो वे इसके ख़िलाफ़ लड़ेंगे.
वीसीके के नेता तिरुमावलवन ने कहा, “हमने टीवीके को समर्थन करने का निर्णय इसलिए लिया है क्योंकि हम नहीं चाहते कि राजनीतिक संकट का फ़ायदा उठाकर राष्ट्रपति शासन थोपा जाए. विजय की सरकार बनाने में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए.”
वहीं वरिष्ठ पत्रकार एलंगोवन राजशेखरन ने बीबीसी तमिल से कहा, “हमें इंतज़ार करना होगा और देखना होगा कि सरकार बनाने के बाद विजय उनके साथ पैदा होने वाले किसी भी विवाद से कैसे निपटेंगे.”
हालांकि शिवप्रियन कहते हैं, “मौजूदा माहौल में कोई भी पार्टी दोबारा चुनाव नहीं चाहती. इसलिए बिना बहुमत के बावजूद विजय का सरकार बनाना ही अच्छा समाधान था.”

